मुझे लगता है

ज़मीन के किसी गुमनाम मंतक़े में
हम कभी साथ साथ रहते थे
मुझे अब तुम्हारा नाम याद नहीं
तुम्हारी शक्ल भी याद नहीं
मगर ये लगता है
कि शायद कई सदियाँ पहले
किसी पिछले जन्म की सीढ़ियों पर
हम साथ साथ बैठते थे
वो सीढ़ियाँ कहाँ थीं
और पिछ्ला जन्म कहाँ हुआ था
मुझे तो याद नहीं
शायद तुम को भी याद न होगा
हाँ बस इतना याद है
एक छोटे से घर में
हम सर-ए-शाम देवता के लिए दिए जलाते थे
और दियों के क़रीब एक पंछी रहता था
जो बादल बरखा और धूप के गीत गाता था
गीत सुनते सुनते
और दिए बुझने से पहले ही
हम नमदों पर सो जाते थे
और फिर हम दोनों मिल कर
एक जैसा कोई ख़्वाब देखते थे
बहुत से तालाबों जंगलों
और बाग़ों का ख़्वाब
सुब्ह-दम अँगनाई में सूरज उतर आता था
पंछी पेड़ों पर
और एक बादल छत पर बैठ जाता था
फिर हम चौखट पर बैठ कर
रंगों की बाज़गश्तें सुनते हुए
एक तालाब को देखते रहते थे
मुझे लगता है ये हम ही थे
जो तालाब की तरफ़ देखते और बाज़गश्तें सुनते थे
हाँ शायद हम ही थे
अब ये याद नहीं उस समय हमारे नाम क्या थे

— Tabassum Kashmiri

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