पहले हम पर प्यार जताया करते थे

फिर हम को बेज़ार बताया करते थे

जो बातें नज़रों से समझी जाती हैं
हम उन को कह कर समझाया करते थे

राख लगी रोटी भी अच्छी लगती थी
जब मेहनत से लोग कमाया करते थे

तब जिस
में बस सच ही लिक्खा होता था
लोग उसे अख़बार बताया करते थे

अब तो रूहें भी बिक जाती हैं उन की
जो ख़ुद को ख़ुद्दार बताया करते थे

क्यूँ वो ही दिल को ग़म देते हैं साहिब
जिन को हम ग़मख़्वार बुलाया करते थे

उस से वहशत है 'सलमा' पहले जिस को
हम भी कू-ए-यार बताया करते थे

— Salma Malik

More by Salma Malik

Other ghazal from the same pen

See all from Salma Malik →

Muflisi Shayari

Shers of muflisi.

All Muflisi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling