दिनचढ़तेहीजहाँ
बुद्धम्शर्णम्गच्छामी
गूँजउठताहै
जहाँहनूमानमंदिरमें
घंटियाँबजनेलगतीहैं
जहाँलोगमस्जिदगिरजेसे
ऊपरवालेकोयादकर
दिनकेकामपेनिकलपड़तेहैं
मैंनेवोलंकादेखीहै
मैंनेसोनेकीलंकादेखीहै
मैंनेरावनराक्षसकीलंकादेखीहै
लेकिनमैंनेलंकामेंयेभीदेखा
किइंसानअपनेअंदरकेराक्षसकावधकर
सारीभिन्नताएँभुलाकरआपसीरंजमिटाकर
एकदूसरेकेसाथअम्न-ओ-शांतिसेरहसकताहै
बसशर्तयेउसेसमुंदरसेघिरेएकजज़ीरेपर
छोड़करतोदेखो