khaamoshi aaj khyaalon si hai | ख़ामोशी आज ख़्यालों सी है

  - Ummed

ख़ामोशी आज ख़्यालों सी है
अब तो हर बात बवालों सी है

  - Ummed

Bahana Shayari

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    मेरे मिज़ाज की उसको ख़बर नहीं रही है
    ये बात मेरे गले से उतर नहीं रही है

    ये रोने-धोने का नाटक तवील मत कर अब
    बिछड़ भी जाए तू मुझसे तो मर नहीं रही है
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    Ashutosh Vdyarthi
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    ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना हामी भर लेना
    बहुत हैं फ़ाएदे इस में मगर अच्छा नहीं लगता
    Javed Akhtar
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    उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी
    ख़मोशी से गुज़र जाऊँगा मैं भी
    Ameer Qazalbash
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    भाई बहनों की मोहब्बत का नशा मत पूछिए
    बे-तकल्लुफ़ हो गए तो गुदगुदी तक आ गए
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    हमारा बचपना जो एल्बमों में क़ैद रहता है
    Shiva awasthi
    ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी
    कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला
    Arzoo Lakhnavi
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    जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी
    जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
    Rahat Indori
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    वहाँ पहले ही आवाज़ें बहुत थीं
    सो मैं ने चुप कराया ख़ामुशी को
    Abhishek shukla
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    Tanoj Dadhich
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    और वो समझे नहीं ये ख़ामुशी क्या चीज़ है
    Nida Fazli
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    तेरे होने से घर की रौनक दुगुना हो जाए
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    Ummed
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    कुछ तो बातें मन की हम से भी तो बोल
    Ummed
    दिल में यादों का समंदर लाये हो
    लगता हैं जी भर के रो आये हो
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    Ummed
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    बिन तेरे मैं भी पागल पागल रहता हूँ
    Ummed

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