duniya men aur vaqt bitaane ka man nahin | दुनिया में और वक़्त बिताने का मन नहीं

  - Varun Anand

दुनिया में और वक़्त बिताने का मन नहीं
लेकिन ख़ुदा के पास भी जाने का मन नहीं

बैठे हैं और ख़ाक हुए जा रहे हैं हम
फिर भी तिरे दयार से जाने का मन नहीं

मन कह रहा है आज हक़ीक़त करें बयाँ
लेकिन तिरे ख़िलाफ़ भी जाने का मन नहीं

मजबूर हो के उस से गले मिल रहे हैं हम
वो जिस सेे हम को हाथ मिलाने का मन नहीं

कर सकता हूँ मैं बंद भी कश्ती का वो सूराख़
पर आज अपनी जान बचाने का मन नहीं

इक रोग है जो तुझको बताना नहीं कभी
इक ज़ख़्म है जो तुझको दिखाने का मन नहीं

  - Varun Anand

Mehboob Shayari

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