Ali Abbas Ummeed

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Ali Abbas Ummeed shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ali Abbas Ummeed's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Ali Abbas Ummeed
तवील सोच है और मुख़्तसर लहू मेरा
गराँ सफ़र में है ज़ाद-ए-सफ़र लहू मेरा

वो रौनक़ें भी गईं उस के ख़ुश्क होते ही
सजाता रहता था दीवार-ओ-दर लहू मेरा

हर एक लम्हा मुझे ज़िंदगी ने क़त्ल किया
तमाम उम्र रहा मेरे सर लहू मेरा

दयार-ए-ग़ैर को महका गया हिना बन कर
ये वाक़िआ'' है रहा बे-हुनर लहू मेरा

वो रूह थी जिसे अहद-ए-वफ़ा का पास न था
कभी न छोड़ सका अपना घर लहू मेरा

उजाल देंगे अँधेरों की ये जबीं इक दिन
बिखेरता है कुछ ऐसे शरर लहू मेरा

रवाँ है क़ाफ़िला-ए-फ़िक्र सू-ए-दश्त-ए-जुनूँ
दिखा रहा है उसे रहगुज़र लहू मेरा

रवानी लिखती रही जिन का नाम आठ पहर
वहीं बहाएा गया ख़ाक पर लहू मेरा

न जाने कौन सी रुत आ गई 'उमीद' अब के
छुपा न पाई मिरी चश्म-ए-तर लहू मेरा
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Ali Abbas Ummeed
क़ज़ा के साथ चले ज़िंदगी के बदले में
मिली न छाँव भी अहल-ए-अमल को रस्ते में

जवाब-ए-शहर-ए-ख़मोशाँ हर एक बस्ती है
गुलाब खिलते नहीं अब किसी दरीचे में

ग़म-ए-हयात की पैग़म्बराना उल्फ़त को
न जाने कब से बसाए हुए हैं सीने में

पहुँच चुके हैं यक़ीं की हुदूद में फिर भी
लरज़ रहे हैं क़दम साथ साथ चलने में

शुऊ'र-ए-ज़ीस्त की अल्हड़ किरन नज़र आई
हयात-ए-नौ के सिमटते हुए धुँदलके में

तुम्हारे क़ुर्ब की वो साअ'त-ए-हसीं अब भी
रवाँ है साथ मिरे याद के सफ़ीने में

हर एक साँस सू-ए-कहकशाँ बढ़ी लेकिन
क़दम भटकते रहे उम्र भर अँधेरे में

निकल के महबस-ए-शब-रंग से जुनूँ वाले
असीर होते रहे अस्र-ए-नौ के धोके में

करे जो अज़्म-ए-सफ़र उस को ये ख़बर कर दो
कि इक पड़ाव हैं हम इस तवील मेले में

बहा जो सुब्ह-ए-बहाराँ की जुस्तुजू में 'उमीद'
उसी लहू का है परतव हर इक शगूफ़े में
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