Madhav Awana

Madhav Awana

@madhav-awana

Madhav Awana shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Madhav Awana's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Nazm
देख कर किसी का देश के लिए उपवास,
हम नेताओं का उड़ाते हैं उपहास
और देते हैं गालियाँ
बस हमारा फ़र्ज़ पूरा
जब भी होता है कोई आन्दोलन
हम यार दोस्तों का कर के सम्मलेन
निगाह सरकार पे डालते हैं सवालिया
बस हमारा फ़र्ज़ पूरा
देश जाता है जहाँ जाए
नेता चाहे जैसे भी देश को चलाएँ
हम ड्यूटी कर देते हैं पाँच साल
बस हमारा फ़र्ज़ पूरा
पानी हो चला है हमारा ख़ून
अब कहाँ देश-भक्ति का जुनून
रोज़ कहते हैं अच्छा नहीं हमारा क़ानून
बस हमारा फ़र्ज़ पूरा
हम डर से मानते हैं क़ानून-क़ाएदा
ऐसी आज़ादी का क्या फ़ाएदा
सच मानते हैं पाँच साल वाला वअ'दा
बस हमारा फ़र्ज़ पूरा
जल्दी भुला देते हैं ऊपर पड़ी लात को
फिर क्यूँ भुनते हैं हम बिना बात को
जब इतना ही बहाना बनाना है हम आप को
कि बस हमारा फ़र्ज़ पूरा
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फिर वही माहौल वही शोर-शराबा
वही कुछ नए पुराने चेहरों का बोल-बाला
फिर से सज गई तब्दीलियों की मंडियाँ
पर अस्ल में कुछ नहीं बदलने वाला
फिर चीख़ते फिर रहे बद-हवास चेहरे
फिर रचे जानें लगें हैं षड्यंत्र गहरे
फिर से गूँजने लगें हैं फ़ज़ाओं में नारे
पिछलग्गू बन गए हैं कुछ भूक के मारे
फिर से ये बताई जाने लगी बदलाव की बातें
फिर से कुर्सी क़ब्ज़ाने को होने लगीं हैं घातें
फिर से आ गया है चुनाव का मौसम पांच-साला
पर अस्ल में कुछ नहीं बदलने वाला
कुछ आ जाएँगे चेहरे नए पुराने
बन के रहनुमा लग जाएँगे देश को खाने
फिर शुरूअ' होगा आम आदमी की तक़दीर से खेल
फिर भेजा जाएगा कुछ हारे हुओं को जेल
फिर से न्याय का ढोंग रचाया जाएगा
आदमी को रोटी के वा'दे से बहलाया जाएगा
फिर से होगा लूट-खसूट का नंगा नाच
फिर झूठ को बताया जाएगा साँच
मुझे जलाएगी मेरे अंदर की आँच
और टूटते सपने चुभेंगे बन के काँच
फिर से ज़िंदगी बुनने लगेगी मकड़-जाला
मैं जानता हूँ कि कुछ नहीं बदलने वाला
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हमारा राजा अंधा और बहरा
राजा अपनी बनाई रतौंधी में मस्त है
न देख सकता है न सुन सकता है
जड़ पत्थर सा कि हमें क्या कष्ट है
पर राजा न जानें कहाँ से
पता करता महसूस कर लेता
कि जनता की जेब में है पैसे
महँगाई बढ़ा कर टेक्स लगा कर
हज़ार करोर से बहाने बना कर
निकलवा लेता है कैसे न कैसे
राजा अहंकार से भरा
राजा बना रहता है सब से खरा
राजा हल्क़ से निवाले खींचता है
राजा हमारी दुर्दशा से आँखें मीचता है
राजा पाँच साल में एक बार आता है
राजा पथराई आँखों को सपने दिखता है
राजा फिर पाँच साल को महल में सो जाता है
जनता को बताया जाता है यही
कि राजा होता है हमेशा सही
राजा जनता की सेवा में वयस़्त है
जबकि जानते हैं सभी हमारा राजा
अपनी बनाई रतौंधी में मस्त है
उसे क्या मतलब हम से
कि हमें क्या दुख है क्या कष्ट है
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मैं ने कहा ये मुल्क एक है
तो सब के लिए एक सा हो क़ानून
तो उन्होंने कहा कि
मैं फिरका-परस्त की तरह बोलता हूँ
मैं ने कहा कि मंदिर मस्जिद से ज़ियादा ज़रूरी है
ता'लीम हर इंसान को और हर पेट को रोटी
तो उन्होंने कहा कि
मैं नास्तिक सा ईश्वर को ज़रूरत में तोलता हूँ
मैं ने कहा कि तुम हम ने चुने हो
तो हमारा विकास करो
न सिर्फ़ अपनी तिजोरियाँ भरो
तो उन्होंने कहा कि
मैं बे-वज्ह राज़ खोलता हूँ
मैं ने कहा सारा मुल्क एक है
बस कुछ दिन में बदल देंगे
मिल कर हम सारा निज़ाम
वो कुछ नहीं बोले अब
बस हँसते रहे
मेरी बात और मेरे ख़यालात पर
अब वो सब ज़ोर से हँस रहे है
और मेरे पाँव जैसे धरती में धँस रहे हैं
मैं जानता हूँ कि वो सारे मुल्क पर हँस रहे हैं
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