
तुझे ख़बर भी है ऐ बे-वफ़ा हज़ारों ने
हयात काट दी रो रो के ग़म के मारों ने
मिलूँ मैं चाँद से अपने तो किस तरह से मिलूँ
फ़लक को घेर लिया है कई सितारों ने
— Zeeshan kaavish
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