
गुल भी हो सकता है और जाम भी हो सकता है
हुस्न का तेरे कोई नाम भी हो सकता है
अपने किरदार से ऐ नाम कमाने वाले
तेरी ख़ातिर कोई बदनाम भी हो सकता है
— Zeeshan kaavish
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