नशेमन उस का फिर आबाद होगा
परिंदा क़ैदस आज़ाद होगा
करेंगे इश्क़ हम इक दूसरे से
वज़ीफ़ा ये तुम्हें भी याद होगा
मिरी तकलीफ़ बढ़ती जा रही है
मिरा दुश्मन यक़ीनन शाद होगा
किसी के दिल में गर नफ़रत भरी है
तो वो इंसान भी जल्लाद होगा
गुनाहों से जो बचता है यहाँ पर
बरोज़े हश्र भी वो शाद होगा
मेरी ख़ुशियों से वो जलने लगा है
ज़फर फिर ग़म नया ईजाद होगा
— Zafar Siddqui















