har ik aansu ka haq mujh ko chukaana hai | हर इक आँसू का हक़ मुझ को चुकाना है

  - Amaan Pathan

हर इक आँसू का हक़ मुझ को चुकाना है
ग़ज़ल से अब मुझे पैसा कमाना है

किसी की भी हिकायत ये नहीं सुनता
बड़ा बेदर्द ये जाहिल ज़माना है

करूँ मैं इल्तिजा कोई ख़ुदा से क्यूँ
न आया है मिरा नंबर न आना है

मोहब्बत थी तिजारत थी ख़ुदा जाने
मगर फिर से नहीं अब दिल लगाना है

नहीं है दौड़ ये कोई मगर फिर भी
न जाने क्यूँ तुम्हें मुझ को हराना है

ये हर इंसान को पागल समझते हैं
मुझे लोगों को पागल-पन दिखाना है

सहाफ़ी तू कभी तो मुख़बिरी कर दे
बड़ा बेहाल हूँ उस को बताना है

  - Amaan Pathan

Dil Shayari

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