ye zindagi tamaam bita di hai pyaas mein | ये ज़िंदगी तमाम बिता दी है प्यास में

  - Amaan Pathan

ये ज़िंदगी तमाम बिता दी है प्यास में
फिर क्यों हर एक रात बिताते हैं आस में

मैं घोल कर के पी गया हूँ ज़िंदगी को यूँ
पूरी किताब बस गई है इक़्तिबास में

तुम जाम माँगते हो बड़ी छोटी चीज़ है
मैं धड़कनें रखूँ जो कहो इस गिलास में

सब यार सोचते थे रहेगा वही समाँ
इक मैं ही बस बचा हूँ कोई सौ पचास में

हमने भी तो निकाले हैं नासूर काट कर
हमने भी दिन गुज़ारे हैं काले लिबास में

वो शेर जिसको सुनके सभी ग़मज़दा हुए
वो शेर तो लिखा था कोई चौथी क्लास में

इन आजकल के होटलों में बात वो कहाँ
जो बात यार गाँव के गुड़ की मिठास में

कैसे अमान अब ये सुधर जाएँ आदतें
हमने बिताए दिन हैं ख़राबों के पास में

  - Amaan Pathan

Aadmi Shayari

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