किसी को भेज ख़ुदा जो मेरा ख़याल रखे
कभी हो कोई तो ऐसा जो सालों-साल रखे
समझ ले काश बिना बोले वो मेरी ख़्वाहिश
वो आए और मेरे होंठों पे अपने गाल रखे
उसे परिंदे पकड़ने हैं तो सलाह ले और
वहाँ पे दाने भी डाले न सिर्फ़ जाल रखे
तब उस ने यूँ ही नहीं ज़ुल्फ़ें खोल दी अपनी
थी धूप सो मेरी आरिज़ पे अपने बाल रखे
— Ayush Aavart















