
सफ़र मुझ ऐसे सुख़न-वर का रायगाँ कैसे
ख़राब इश्क़ को कहती हो जान-ए-जाँ, कैसे
तुम उस से कह दो मैं महफ़िल में हूँ हसीनों की
उसे ख़बर है मैं होता हूँ कब कहाँ कैसे
— Ayush Aavart
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