बुजुर्गों की दी ये इकलौती दौलत छोड़ जाएँगे
दो आँखों में बसे रहने की आदत छोड़ जाएँगे
दो आँखें, वो अदा, इक मुस्कुराहट जिस गली में हैं
उसी सकरी गली में हम मोहब्बत छोड़ जाएँगे
ये सारा जिस्म ले कर हम चले जाएँगे जब कल शब
तुम्हारे पास अपने दिल की तुर्बत छोड़ जाएँगे
करेगा याद मुझ को ये ज़माना मेरे जाने पर
सभी के दिल में हम ऐसी मोहब्बत छोड़ जाएँगे
ग़रीबी का त'अल्लुक मेरे बच्चों से कभी ना हो
हम अपनी ज़िंदगी में इतनी उजरत छोड़ जाएँगे
हुआ ऐलान नौकरशाही के पेशे का हम को 'दास'
चले जो हम गए तो ख़ुद की किस्मत छोड़ जाएँगे
— Das Kanpuri















