ज़मीं की बात और न आसमाँ की बात करते हैंजहाँ हमारी फ़िक्र है वहाँ की बात करते हैंजहाँ गरीब को मिले न रोटी एक वक़्त कीचलो अमीर ज़ादों हम वहाँ की बात करते हैं— Dard Faiz Khan