तेरे नगर में आए ज़माने गुज़र गए
दिल को क़रार पाए ज़माने गुज़र गए
बरकत भी ख़त्म हो गई मेरे मकान की
मेहमान घर में आए ज़माने गुज़र गए
आती हैं याद मुझ को सदा दाल रोटियाँ
हाथों से माँ के खाए ज़माने गुज़र गए
मेरी गली से सारे वो बच्चे कहाँ गए
पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए
तुम को सुना रहा है यहाँ फ़ैज़ इक ग़ज़ल
ख़ल्वत में गीत गाए ज़माने गुज़र गए
— Dard Faiz Khan















