
ये दिल है तेरा या मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
ये शाम है या सवेरा ख़याल कुछ भी नहीं
याँ इक मैं हूँ जिस को तेरा ही है ख़याल फ़क़त
वाँ इक तू है जिस को मेरा ख़याल कुछ भी नहीं
— Deep kamal panecha
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