इमरोज़"दीप"चलकोईउनपेग़ज़लकरें
अपनेपुरानेतौरकोथोड़ाबदलकरें
ग़ज़लोंमेंअपनीउनकेलिएइकमहलकरें
उनकेइशारोंपेजहाँहरशयअमलकरें
दिलउनकोएकपलकीझलकपेमैंनेदिया
लेकिननजानेबसवोहीक्यूँँआज-कलकरें
हरएकबारहमभलाक्यूँहीपहलकरें
इसकाकभीतोकोईतोवोभीतोहलकरें
इकबे-वफ़ाईठीकनहींतौरछलनेका
ज़ुल्फ़ोंअदाओंनज़रोंनिगाहोंसेछलकरें
मरजातेहैंतमन्नायेदिलजानआरज़ू
बसआपप्यारतोज़राजानीसँभलकरें
दीदार-ए-इश्क़क्याहसींहै,देखनाहोगर
सोइश्क़,बंदिशोंसेजरातोनिकलकरें
ज़िक्र-ए-रक़ीबपेउठाहूँउनकीबज़्मसे
अब"दीप"औरकितनासहनकितनेपलकरें