जैसे मैं अपनी ये मूँछें तानता हूँ
ठीक वैसे तिरी इज़्ज़त मानता हूँ
कुछ नहीं है तू मेरा पर इश्क़ तो है
ख़ाक-ए-दर तेरी मैं माथे जानता हूँ
आज कुछ कुछ उदासी है तेरे मुँह पे
लहजे से यार तुझ को पहचानता हूँ
मेरा ये हाल है तेरे जाने के बा'द (1)
राहों की धूल आँखों से छानता हूँ
मेरी माँ बा'द तू, तेरे बा'द है रब
अब तो जानाँ मैं इतना ही जानता हूँ
— Deep kamal panecha















