मिरी तस्वीर में उस का न होना

लगे तासीर का नुस्ख़ा न होना

मियाँ मैं उस के बिन ऐसा हूँ जैसे
अँगूठी में नगीने का न होना

मैं इतना हो गया हूँ ग़ैर साया
मिरा साया लगे मेरा न होना

अदालत में गवाही दे रहा है
कोई साहिल समुंदर का न होना

सजी है वो मगर नाराज़ भी है
है जाहिर कान में झुमका न होना

यक़ीनन ये कमी उस की कमी है
ज़रूरी लफ़्ज़ पे नुक़्ता न होना

शिकायत इस तरह से कर रहा है
मकाँ मंज़ूर है कमरा न होना

वो अब मेरी तरफ़ से लड़ रहा है
कभी जो चाहता मेरा न होना

वो होना चाहता है आईना पर
दर-ओ-दीवार पर लटका न होना

तरासोगे तो ख़ुद में पा सकोगे
था होना चाहिए क्या क्या न होना

मिरे अपनों में तो सब दिख रहे हैं
मगर अफ़सोस है उस का न होना

— Dinesh Sen Shubh

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