sab chaand nikalne ki taraf dekh rahein hain | सब चाँद निकलने की तरफ़ देख रहें हैं

  - Shadab Asghar

सब चाँद निकलने की तरफ़ देख रहें हैं
हम चाँद से चेहरे की तरफ़ देख रहें हैं

तू लौट के आजाएगा उम्मीद है अब भी
हम बैठ के रास्ते की तरफ़ देख रहें हैं

खिड़की की तरफ वो है और उस के बगल हम
हम खिड़की क शीशे की तरफ़ देख रहें हैं

हम को न ख़बर कुछ किसी दुनिया की बला का
हम हुस्न तुम्हारे की तरफ़ देख रहें हैं

इक़ पल में भुला बैठें हैं दुनिया के मसाइल
इक़ छोटे से बच्चे की तरफ़ देख रहें हैं

  - Shadab Asghar

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