ये मेरे साथ क्या हो गया
यार मेरा ख़फ़ा हो गया
तूफ़ा जो है उठा ज़ीस्त में
उस का मैं ना-ख़ुदा हो गया
खो गया चाँद मेरा कहीं
अब तो मैं रत-जगा हो गया
देख मुझ को पलट तू गया
क्या तेरा फ़ैसला हो गया
मैं ने लिख दी ग़ज़ल तुझ पे तो
शहर में तब्सिरा हो गया
मैं बिछड़ कर हूँ रोया बहुत
अब तो ये सिलसिला हो गया
दर्द क्या लगता है तेरा मन
ये तेरा आइना हो गया
— Manish jain














