आज कोई घर नहीं
यार फ़ोन पर नहीं
आज कल के रोमिओ
इश्क़ का हुनर नहीं
ख़ुद बता के आए हैं
अब वो बे-ख़बर नहीं
ख़त लिखा है यार को
क्या लिखा ख़बर नहीं
किस सड़क ले आए तुम
एक खंडहर नहीं
दस्तकों पे दस्तकें
मैं अभी भी घर नहीं
ज़हर सब मिला लिए
फिर भी कुछ असर नहीं
किस तरह से रंग भरूँ
कैनवस कलर नहीं
गाँव अब बदल गया
मोड़ पे वो बर नहीं
बिल्डिंगे ही बिल्डिंगे
एक भी शजर नहीं
और बस गले मिले
सच बता न डर नहीं
— Piyush Sharma














