भला क्या किस का था कैसा हमारा
उसी ने छीना है सबका हमारा
जो टूटी चूड़ियाँ हाथों की उस की
निकलने ख़ुद लगा रोना हमारा
ख़मोशी ही सुनाई दे दे शायद
है चेहरा वैसे भी सहमा हमारा
वहाँ से लौट कर आया नहीं वो
कबूतर खो गया भेजा हमारा
सुनो मैं जीत कर हारा हूँ वैसे
किसी ने छीना है जीता हमारा
— Amanpreet singh















