जानते हो तुम सच्चे इश्क़ की रवानी क्या
मरने भर से पूरी हो जाती है कहानी क्या
मेरी इन सफलताओं से उदास हैं वो सब
उन को ये नहीं दिखती काँटों की निशानी क्या
क्यूँ उदास रहते हो साफ़ साफ़ कह दो ये
अबकी बार भी वो बातें नहीं निभानी क्या
अपने प्यारे से क्यूँ तुम सारे दिन झगड़ते हो
आप को ये कश्ती तट पर नहीं लगानी क्या
— Pritam sihag















