मन की तसल्ली के लिए इक काम मैं करता गया
हक़ में दुआएँ यार के हर शाम मैं करता गया
तर्क-ए-त'अल्लुक़ वो मुझे बदले में आँसू दे गए
फिर मयकशी में आँसुओं को जाम मैं करता गया
इतना कहाँ आसान है रातें सताती है मगर
अफ़्सोस रातें रोज़ उस के नाम मैं करता गया
जितना किया मैं ने किया उस की ख़ुशी के वास्ते
इस इश्क़ में ख़ुद को बहुत बदनाम मैं करता गया
मेरी ख़ता है 'वीर' मैं ने मानकर उस को ख़ुदा
फिर की 'इबादत और दिल को धाम मैं करता गया
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