रहनुमा है जो रूठ कर आए
ढूँढ़ते उन को दर-ब-दर आए
आज सजदे में ये दुआ माँगी
याद भी उन की उम्र-भर आए
मौत के अब गले लगेंगे हम
लौट कर फिर न वो अगर आए
लगता शायद है आख़िरी दिन ये
घर को मेरे है चारा-गर आए
है गुज़ारिश ख़ुदा से ये मेरी
रूठ कर ही मगर वो घर आए
— Ritika reet















