इक तमन्ना सराब करनी है
रात सारी ख़राब करनी है
तीरगी के स्याह सीने से
रौशनी दस्तयाब करनी है
नफ़रतों का हिसाब रखना है
उल्फ़तें बे-हिसाब करनी है
उस नज़र से ख़िताब करना है
गुफ़्तगू लाजवाब करनी है
ज़िंदगी कामयाब होगी ही
आख़िरत कामयाब करनी है
— Salman Yusuf















