उस को जो क़त्ल-ए-आम का मतलब नहीं पता
मुझ को भी इंतिक़ाम का मतलब नहीं पता
आते हो रोज़ ख़्वाब में और वो भी देर रात
क्या तुम को सुब्ह शाम का मतलब नहीं पता
कह तो दिया कि आप के दर का ग़ुलाम हूँ
क्या आप को ग़ुलाम का मतलब नहीं पता
कहने लगे कि मुझ को तेरा सब पता है दोस्त
लेकिन तुम्हारे नाम का मतलब नहीं पता
पीता हूँ नीली झील के पानी की मैं शराब
यारों को मेरे जाम का मतलब नहीं पता
— Salman Yusuf















