ये भी सच है कि हम में बचा कुछ नहीं
मैं तो उस का ही हूँ वो मेरा कुछ नहीं
या'नी अब हम उसे याद आते नहीं
या'नी मुद्दत से उस ने लिखा कुछ नहीं
उस को कैसे मनाते कि उस के यहाँ
मिन्नतें कुछ नहीं इल्तिजा कुछ नहीं
अब कहानी का किरदार मर जाएगा
अब कहानी के अंदर बचा कुछ नहीं
हम दरख़्तों से फैले हुए हैं मगर
अपनी जड़ का हमें ही पता कुछ नहीं
— Salman Yusuf















