हम ने आँखों को तेरा ख़्वाब दिखाना भी नहीं है
तुझ से मिलना भी नहीं छोड़ के जाना भी नहीं है
चाँद चेहरे पे चमकती हुई आँखें हैं क़यामत
दाद देनी है मगर दाम में आना भी नहीं है
साँस लेनी है तर ओ ताज़ा हवा में भी सभी को
शिकवा करना है कोई पेड़ लगाना भी नहीं है
तू जो हँस हँस के मिला सब से ज़रा मुझ को बता तो
कुछ बताना भी है यूँ या के बताना भी नहीं है
एक उम्मीद की दीवार गिरी क़ल्ब में कल शब
एक आँसू है कि पलकों से गिराना भी नहीं है
— Salman Yusuf















