है बड़ी पुर-कैफ़ वो तस्वीर उस की
क्या कहें दिलकश बड़ी है हीर उस की
जाँ हमारी हम ख़ुशी से दें तभी तो
इस गले पर हो अगर शमशीर उस की
प्यार पर तेरे भरोसा कर लिया था
हाँ फ़क़त इतनी रही तक़्सीर उस की
इस तरह अब दिल मिरा क़ैदी हुआ है
है क़फ़स मेरा मगर ज़ंजीर उस की
बस रहे गंदी निगाहों से बची वो
या-ख़ुदा ऐसी बना तक़दीर उस की
— Sandhya maurya















