आँसू आँखों से गिरा तो तन्हा हो जाएगा फिर
गाल पर जो ये टिका तो तेरा हो जाएगा फिर
कहने को तो है बहुत कुछ इस ज़माने में मगर
मेरे कहने भर से क्या तू मेरा हो जाएगा फिर
ये इबादत इल्तिजा सब तो नहीं मंज़ूर पर
हाथ था
में जो मेरा तो सौदा हो जाएगा फिर
सिर्फ़ बातों में गुज़रने वाली है और एक शब
और इन्हीं बातो में ढलता क़िस्सा हो जाएगा फिर
रंग दो मेरे तसव्वुर को क़लम से तुम कभी
कोरा काग़ज़ तुम से चिपका हिस्सा हो जाएगा फिर
— Ashkrit Tiwari















