jiska khayal zehan pe chaaya tamaam shab | जिसका ख़याल ज़ेहन पे छाया तमाम शब

  - Shajar Abbas

जिसका ख़याल ज़ेहन पे छाया तमाम शब
मिलने को वो न ख़्वाब में आया तमाम शब

अपने लहू से सीना-ए-क़िर्तास पर तिरा
लिख लिख के नाम हमने मिटाया तमाम शब

चलता रहा दिमाग़ में यादों का सिलसिला
हमने सुकून-ए-दिल नहीं पाया तमाम शब

इक बे-वफ़ा की याद में अफ़सोस है हमें
सैलाब आँसुओं का बहाएा तमाम शब

अहद-ए-वफ़ा को सोच के वादों को सोचकर
अपना मज़ाक हमने उड़ाया तमाम शब

दिल को सुकून जब न उदासी में आ सका
तन्हाई को गले से लगाया तमाम शब

जब कोई नग़्मा सुनने को बाक़ी नहीं रहा
फिर नग़्मा चाँद को ही सुनाया तमाम शब

तन्हा नहीं हूँ मैं तिरे जाने के बाद में
चलता है साथ में मिरे साया तमाम शब

ख़ुश हो के तुम तो बैठ के डोली में चल दिए
हिजरत का सोग हमने मनाया तमाम शब

लेने को मेरी ख़ैर ख़बर देखिए शजर
कोई न आया अपना पराया तमाम शब

  - Shajar Abbas

Hijr Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Shajar Abbas

As you were reading Shayari by Shajar Abbas

Similar Writers

our suggestion based on Shajar Abbas

Similar Moods

As you were reading Hijr Shayari Shayari