"मशवरा"
सुना है हम से बिछड़ के अक्सर उदास रहती हो आज कल तुम
उदास रहना सही नहीं है
उदासी जो है बुरी बला है
हमारी मानों उदासी छोड़ो
उदास रहना सही नहीं है
उदास क्यूँ हो
उदास रहना सही नहीं है
सुना है सारी सहेलियों ने तुम्हें हँसाने की कोशिशे की
मगर कोई भी हँसा न पाई
तुम्हारे नाज़ुक लबों पे कोई ज़रा तबस्सुम भी ला न पाई
हर इक सहेली ने हाल देखा
उदास देखा
उदास देखा तुम्हें तुम्हारी सहेलियों ने तो ख़ूब रोयीं
मलाल कर के
ये सोच कर के
हमारी प्यारी सखी को आख़िर ये क्या हुआ है
हमेशा हँसती थी जो सहेली उदास होकर वो बैठती है
न मुस्कुराती है पहले जैसी न अब किसी से भी बोलती है
उदास रहती है बस हमेशा
किसी के बारे में सोचती है
सखी ये रो कर सखी से बोली
वो कौन लड़का है जिस की यादों ने इस को दीवाना कर दिया है
हर एक से बे गाना कर दिया है
सखी ये रो कर सखी से बोली
दुआएँ माँगो
सखी के हक़ में
दुआएँ माँगो
सुना है मिल कर
तुम्हारे हक़ में ख़ुदा से सब ने
दुआएँ माँगीं
सुना है मैं ने दुआएँ ये थीं
कोई भी हो वो कहीं भी हो वो
ख़ुदा करे वो सही सलामत पलट के आए
इसे वो अपने गले लगाए
इसे हमेशा वो साथ रक्खे
वो इस से या रब कभी न बिछड़े
हमेशा इस को रखे मुहब्ब्त के साएबाँ में
हमेशा इस के लबों की ज़ीनत को वो बढ़ाए
सखी ये रो कर सखी से बोली
दुआएँ माँगो
सखी के हक़ में
कभी हमारी सखी को कोई अलम नहीं हो
सखी कभी भी न ग़म-ज़दा हो
सदा तबस्सुम रहे हमारी सखी के लब पर
ये मुस्कुराती रही हमेशा
उठा के हाथों को साथ मिल कर
दुआएँ माँगो
सखी हमेशा ही मुस्कुराए
ये सब दुआएँ तुम्हारी सखियों ने रब से माँगी
मलाल हाए मलाल जानाँ
हमें हमेशा ये ग़म रहेगा
दुआएँ उन की न होंगी पूरी
पलट के अब हम न आ सकेंगे
गले न तुम को लगा सकेंगे
न अपने हमराह रख सकेंगे
न अब तुम्हारे लबों पे शायद कभी तबस्सुम सजा सकेंगे
न रख सकेंगे मुआ'फ़ करना कभी मोहब्बत के साएबाँ में
मुआ'फ़ करना
जो हो सके तो ख़ुदा की ख़ातिर
मुआ'फ़ करना
अरे हाँ अच्छा ख़याल आया
सुनो हमारी ये बात सुन लो
तमाम बातों को तर्क कर दो
ये बात सुन लो
हमारा मिलना न हो सकेगा
न एक दूजे को हम मिलेंगे
लिखा था क़िस्मत में जो ख़ुदा ने वो हो गया है
फ़िराक़ लिक्खा था अपनी क़िस्मत में अपने दोनों बिछड़ गए हैं
मलाल है पर
मुझे बताओ
मलाल करने से क्या है हासिल
था जो भी होना वो हो गया है
बिछड़ चुके हैं
मलाल छोड़ो
उदासी छोड़ो
तुम्हें हमारी क़सम है समझीं
उदासी छोड़ो
अरे हाँ मेरी ये बात सुन लो
तुम्हारे दिल को सुकूँ मिलेगा
बुज़ुर्ग लोगों से जो सुना है सुनो मैं तुम को बता रहा हूँ
बुज़ुर्ग लोगों ने ये कहा है
ख़ुदा की मर्ज़ी के आगे नईं तो किसी की चलती है नईं चलेगी
ये सच है
तो बात मानो
उदासी छोड़ो
उदास रहने से ये तुम्हारे ज़माना सारा उदास होगा
तुम्हारी सखियाँ उदास होंगी सभी अक़ारिब उदास होंगे
परिंद दरिया उदास होंगे शजर समुंदर उदास होंगे
ये फूल कलियाँ उदास होंगी ये चाँद तारे उदास होंगे
ये फ़र्श सारा उदास होगा ये अर्श सारा उदास होगा
तुम्हें हमारी क़सम है समझीं
उदासी छोड़ो
तुम्हारे होंठों के वास्ते ही हँसी बनाई है किब्रिया ने
तुम्हारा हक़ है ये अपना हक़ लो
हसीं लबों पर हँसी सजाओ
लबों पे अपने हँसी सजाकर हँसी की ज़ीनत को तुम बढ़ाओ
हमारी मानो
तुम्हें हमारी क़सम हैं समझीं
हमारी मानो
उदासी छोड़ो
उदास रहना सही नहीं है
उदासी जो है बुरी बला है
तुम्हें हमारी क़सम हैं समझीं
उदासी छोड़ो
उदास रहना सही नहीं है















