अब शायद वो बात नहीं
सावन में बरसात नहीं
सड़कों पर तो काँटे हैं
कोई साफ़ सिरात नहीं
आँखों में देखा उस के
मेरे लिए जज़्बात नहीं
कैसे मैं तकबीर करूँ
जब कोई मिरआत नहीं
— Shivangi Shivi
सावन में बरसात नहीं
सड़कों पर तो काँटे हैं
कोई साफ़ सिरात नहीं
आँखों में देखा उस के
मेरे लिए जज़्बात नहीं
कैसे मैं तकबीर करूँ
जब कोई मिरआत नहीं
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