कि मुझ सेे जान के अनजान बन सकते हो बन जाना
मेरी तुम दीद के मेहमान बन सकते हो बन जाना
नहीं है फ़ायदे का सौदा बे-बस इश्क़ मेरी जान
मगर चाहो तो तुम नुक़सान बन सकते हो बन जाना
जिगर ने है कहा ये इश्क़ दरिया आग का 'साहिर'
अगर तुम डूब के आसान बन सकते हो बन जाना
— SIDDHARTH SHARMA















