मोमिनों की थी दुआ, ये मक़बरा टूटे नहीं

और रिंदों ने दुआ की मय-कदा टूटे नहीं

कौन कहता है नहीं होती दरारें काम की
देख कर भरना किसी का घोसला टूटे नहीं

जानकी ने सीख दी सहकर जुदाई के अलम
राम के आने से पहले हौसला टूटे नहीं

अब दिखाया उस ने मेरा अक्स असली दोस्तों
डर है मुझ को अब कही ये आइना टूटे नहीं

रक़्स करती हैं तेरी यादें मेरे दिल में सनम
दिल से ऐसी रौनकों का सिलसिला टूटे नहीं

— Sonia rooh

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Faasla Shayari

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