सुख़न दिल से जो लिक्खा है, वो रूहानी मोहब्बत है

लिखूँ ऊला को मैं महबूब तो सानी मुहब्बत है

सभी कुछ खो के दुनिया में यही इक सच को है जाना
कि इस दुनिया ए फ़ानी में भी ला-फ़ानी मोहब्बत है

हमेशा सर झुकाती हूँ शहीदों की मज़ारों पर
वतन के वास्ते बेख़ौफ़ क़ुर्बानी मोहब्बत है

उदासी में मेरे कांधे पे रक्खें हाथ बिन बोले
फ़क़त यारी नहीं वो शय मेरे जानी मोहब्बत है

हज़ारों गुल बदन में खिलते हैं बस उन के आने से
मेरे दिल में खिली जो रात की रानी मोहब्बत है

— Sonia rooh

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