अपनी दुनिया सँवार लेते हैं
आप को जो निहार लेते हैं
ख़ुद को करते है मुब्तिला दुख में
और ख़ुद को पुकार लेते हैं
लोग ख़ुद को तबाह करने को
मुझ से वहशत उधार लेते हैं
कैफ़ियत में तुझे पहनते हैं
और ख़ुद को उतार लेते हैं
उस के बिन रात तो क़यामत है
हाँ मगर दिन गुज़ार लेते हैं
आ कि अब ख़त्म कर दे ये रिश्ता
अपनी ग़लती सुधार लेते है
— Sultan shaafi















