कौन आएगा भला मेरी अयादत के लिए

मैं अगर बीमार हो जाऊँ मुहब्बत के लिए

दिल के मैं जज़्बात कहने के लिए तैयार हूँ
मुंतज़िर हैं लब मगर उन की इजाज़त के लिए

सिर्फ़ यक-तरफ़ा मुहब्बत से नहीं बनती है बात
हौसला भी चाहिए इज़हार-ए-उल्फ़त के लिए

कब तलक दो दिल भला चाहत में संजीदा रहें
एक दिन तो चाहिए थोड़ी शरारत के लिए

सादगी मेरी मुझे नुक़सान पहुँचाती है यूँ
लोग मुझ को याद करते हैं ज़रूरत के लिए

जीते जी बोए थे काँटे जिस ने मेरी राह में
फूल ले के आ रहा है आज तुर्बत के लिए

मैं अगर 'तलहा' लिखूँ कोई नज़ाकत पर किताब
लफ़्ज़ कम पड़ जाएँगे उन की नज़ाकत के लिए

— Talha Lakhnavi

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