सरापा मुहब्बत मुहब्बत है औरत
यक़ीनन ख़ुदा की इनायत है औरत
वो बेटा हो भाई हो शौहर के वालिद
ज़माने में सबकी ज़रूरत है औरत
उसी से तो क़ाएम है दुनिया में रंगत
ये क्यूँ कह रहे हो मुसीबत है औरत
ख़फ़ा हो तो बनती है झाँसी की रानी
वगरना शराफ़त की मूरत है औरत
कोई रूप देखो ज़माने में 'तलहा'
हर इक रूप में ख़ूब-सूरत है औरत
— Talha Lakhnavi















