जिसे इश्क़ था ज़िंदगी से

वही मर गया ख़ुद-कुशी से

मुझे इश्क़ है बस तुझी से
वो ये कह रहा है सभी से

कई मुद्दतों बा'द उस के
हुई दोस्ती बे-कसी से

फ़क़त माँगा है वक़्त उस का
बता वो रहा है घड़ी से

मिटा जुगनुओं का गुमाँ तब
मिले जब वो इक रौशनी से

बता राज़ सब से रहा है
छुपा कुछ तो पर्दा-दरी से

छुए चाँद हैं पर ज़मीं पर
ख़फा आदमी आदमी से

मिला है ग़म-ए-दिल मुझे भी
लगा है गले वो किसी से

वफ़ा की लड़ाई में हम-दम
डरे तान्या दिल-लगी से

— Tanya gupta

More by Tanya gupta

Other ghazal from the same pen

See all from Tanya gupta →

Dosti Shayari Collection

Shers of dosti shayari collection.

All Dosti Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling