ज़रा ढूँढो नबी अपना रिझाने की कला क्या है
करे यूँ बंदगी गोया जहाँ पूछे हुआ क्या है
नज़र आए भला कैसे ज़माने की नज़र को वो
हमें पूछो ख़ुदा के साथ जीने का नशा क्या है
जुदा है वो ख़ुदा से पर ख़ुदा उस से जुदा है कब
नहीं पाया ख़ुदा जिस ने उसे आख़िर मिला क्या है
ये देता सुख यहाँ सब को ख़बर रखता ज़माने की
रज़ा रब की नहीं मानी किसी से फिर गिला क्या है
बिना रहबर किसी को भी न मिलता रास्ता यारों
इसे मालूम होता है कि मंज़िल का पता क्या है
— Tanya gupta















