aap apna bhi tujhe saunp diya hai zohra | आप अपना भी तुझे सौंप दिया है ज़ोहरा

  - ALI ZUHRI

आप अपना भी तुझे सौंप दिया है ज़ोहरा
मुझ में कुछ भी तो नहीं मेरा बचा है ज़ोहरा

बाद तेरे ही ये महसूस किया लोगों ने
अब उदासी ही फ़क़त मेरा पता है ज़ोहरा

जो सजाए थे कभी साथ में मिलकर हमने
ज़िन्दगी उन हसीं ख़्वाबों से जुदा है ज़ोहरा

मेरे माथे की शिकन और ये बहती आँखे
यह मोहब्बत का तेरी मुझको सिला है ज़ोहरा

यूँँ बिछड़ के भी निभाया है त'अल्लुक़ तुझ सेे
मैंने मर के भी तेरा हिज्र जिया है ज़ोहरा

कैसे गुज़रीं हैं ये बरसात की रातें मुझ पर
मेरी आँखों से तेरा दर्द बहा है ज़ोहरा

क्या ख़ुदाओ से भी हो सकती हैं कोई गलती
मुझको लगता था कि तू जैसै ख़ुदा है ज़ोहरा

  - ALI ZUHRI

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