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जो तेज़ दौड़ते थे बहुत जल्द थक गए  - Ahmad Kamal Hashmi

जो तेज़ दौड़ते थे बहुत जल्द थक गए
हम धीरे धीरे चलते हुए दूर तक गए

उतरन पहन के शाह की ख़ुश हैं मुसाहिबीन
सूरज से भीक माँग के ज़र्रे चमक गए

यारों ने ज़ख़्म-ए-दिल का मिरे यूँ किया इलाज
आए थे ख़ून पोंछने रख कर नमक गए

आँखों को इंतिज़ार में पर्दे पे टाँक कर
चौखट से पोस्टर की तरह हम चिपक गए

वो शाइ'री भी है कि नहीं सोचिए 'कमाल'
नाम-ए-ग़ज़ल पे आप बहुत कुछ तो बक गए

- Ahmad Kamal Hashmi

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