ताज़ा हवा के वास्ते खिड़की न बन सका

दे दूँ किसी को छाँव वो बदली न बन सका

बेटा बसा बिदेस में दौलत के ढेर पर
लेकिन वो बूढे बाप की लाठी न बन सका

शाइ'र का वास्ता बड़ा गहरा है भूक से
उस का कलाम आज भी रोटी न बन सका

क्यूँ कर करूँ उमीद तू मुझ सा बनेगा दोस्त
जैसा मैं चाहता हूँ वो ख़ुद भी न बन सका

का'बे से लौट कर वही सूद-ओ-ज़ियाँ की फ़िक्र
हज कर लिया मगर कभी हाजी न बन सका

रह के भी दूर सुन सके अब्बा की खाँसियाँ
बेटा कभी भी बाप की बेटी न बन सका

ख़ुद की कमी को छोड़ कर ग़ैरों पे ही उठे
मैं आज तक 'सहाब' वो उँगली न बन सका

— Ajay Sahaab

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