AKASH
AKASH
Ghazal

सोचते हैं बैठ के दरिया किनारे

काट लेंगे ज़ीस्त यादों के सहारे

शे'र ग़ज़लें और नज़्में ये हमारी
सब हमारे हैं ग़मों के इस्तिहारे

देखता है कौन उन की रौशनी को
चाँद से जो दूर रहते हैं सितारे

हम नहीं रखते परिंदे को क़फ़स में
चलते आया है बुज़ुर्गों से हमारे

शाइरों का काम ही होता यही है
देखते हैं ज़िन्दगी भर राह प्यारे

— AKASH

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