दिल तेरे बा'द मोहब्बत का तलबगार नहीं

सो तू मेहमान है इस दिल का ख़रीदार नहीं

जिस कहानी में न लैला है न मजनूँ जानाँ
उस कहानी में विलन का कोई किरदार नहीं

ये मोहब्बत में सताए हुए लड़के इक दिन
दूसरा इश्क़ करेंगे जो तेरा यार नहीं

ख़ामुशी एक ज़माने से है पिन्हाँ दिल में
और मुझ को ये लगे दिल मेरा बीमार नहीं

जो दु'आओं के सहारे ही मियाँ इश़्क करे
ऐसा दीवाना मोहब्बत का गुनहगार नहीं

तेरी होंठों कि ख़मोशी जो समझता है वो शख़्स
जो तलबगार है तेरा वो तेरा प्यार नहीं

— Md Akhter Ansari

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Bahana Shayari

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